
कभी फसल को तरसते थे खलिहान….
बंजर पड़ी जमीन पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने लिखी नई इबारत
व्यर्थ बह रहे बरसाती पानी का उपयोग कर बनवाया खेत में 2700 वर्ग फिट का तालाब, असिंचित भूमि से प्राप्त की 8 लाख रुपये की ऊपज।




जावेद खान / बर मारवाड़
रायपुर मारवाड़ के बिरांटियां कलां गांव में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने व्यर्थ बह रहे बरसाती पानी का रुख मोड़ कर अपने खेत में 2700 वर्ग फीट का एक बड़ा तालाब बनाकर वर्षा जल संचय किया। जिसका नतीजा यह रहा कि रबी की फसल में बंपर पैदावार प्राप्त की। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीपक नायक ने अपने खेत के पास गुजर रहे व्यर्थ बरसाती पानी का सदुपयोग करते हुए खेत में एक बड़ा तालाब बनवाया। जिससे रबी के दिनों में बंजर पड़ी जमीन से गेंहू और चने की बम्पर पैदावार ली। नायक ने रबी की फसल से करीब 8 लाख की पैदावार कर अपने आस-पास के किसानों के लिए एक नई इबारत पेश की है। जिससे अच्छी पैदावार को देखकर आसपास के किसानों ने भी इस कदम की प्रशंसा की और अपने खेतों में व्यर्थ बह रहे बरसाती पानी को संचय करने का संकल्प लिया।
कुंआ सुखा तो 630 फिट गहरा ट्यूबवेल खुदवाया वो भी नाकार साबित हुआ…
नायक ने बताया की खेत में पुश्तेनी कुआं भी लंबे समय से सुखा होने की स्थिति में फसलों की बुवाई ओर सिंचाई के संकट खड़ा था। मगर आसपास की भूमि में फसलों के लहलहाए ओर मेरा खेत बंजर दिखे यह मुझे सहमा नही जाए इसके लिए खेत मे 630 फीट गहरा ट्यूबवेल खुदवाया मगर वह भी नाकार साबित हुआ। वही आस पास में नहरी क्षेत्र ना होने के कारण रबी की बुवाई के लिए एक बड़ा संकट था।ऐसे में खेत के किनारे 2700 वर्ग फिट और 28 फिट गहरे तालाब का निर्माण करवाया। जिससे रबी की फसल के साथ फलदार पौधों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हुआ।
खेत मे गड्डा करवाते देख लोगो ने बनाया मजाक….
नायक ने बताया कि जब खेत मे किसी भी तरह की कोई फसल नही हो सकती थी और पानी को विंकत समस्या होने से खेत मे गड्डा खोदकर बरसात के पानी का संचय करने का विचार मन मे आया तो इस को करने की ठानी ओर 2700 वर्गफीट तालाब का ख़ुदाई प्रारंभ करवा दी। खेत मे गड्डा होते देख लोगो ने इसका मजाक बनाते हुए कहा कि अपने ही खेत मे बड़ा गड्डा खुदवाकर खेती की जमीन को बदहाल करवा रहे है।
कुंओं का भी बढ़ा जलस्तर…
गुजरात में एक प्राईवेट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नोकरी करने वाले दीपक नायक समय-समय पर खेतों की देखभाल करने के लिए बिरांटियां कलां आते रहते है। पास के किसानों ने जब फसलों के लिए पानी की किल्लत का जिक्र किया तो प्रयोग के तौर पर अपने ही फ़ार्म हाऊस पर बड़े तालाब का निर्माण करवाया। अपने फार्म हाऊस के तालाब का तल भी कच्चा रखा। जिससे कुछ पानी जमा होकर जमीन में जाता रहे। उन्होंने ने बताया की बारिश के दौरान व्यर्थ बहने वाले लाखों गैलन पानी को संरक्षित कर पूरे साल सिंचाई कर सकते है। वहीं फार्म पौंड में पानी संग्रहण होने से आसपास के कुओं का जलस्तर भी बढ़ाया जा सकता है।
दो साल पहले की थी स्ट्रॉबेरी की खेती…ओर बन गया मारवाड़ में रसदार फलों का नायक
नायक ने करीब दो वर्ष पूर्व में भी इस बंजर जमीन पर स्ट्रॉबेरी की फसल उगाने में सफलता प्राप्त की थी।लेकिन, पानी का पीएच लेवल सही नहीं होने की स्थिति में लगभग 70 हजार रुपये का पानी परिवहन करना पड़ा था। क्योंकि खेत मे स्थित कुएं का पानी का जलस्तर कम था और कुछ पानी था भी तो उसका टीडीएस करीब तीन हजार के पास। मगर ठंडे वातावरण में रहने वाले स्ट्रॉबेरी के पौधों के लिए पानी का पांच सौ टीडीएस के करीब हों तो ही सफल खेती की जा सकती है। अब आने वाली वर्षा ऋतु में जल संचय कर दोबारा स्ट्रॉबेरी फसल उगाने का संकल्प किया।
रबी ओर जायद की फसलों के लिए वरदान साबित होता है संरक्षित पानी।
क्षेत्र में बरसाती पानी का समुचित उपयोग नहीं हो पाता। हर साल बरसाती पानी पहाड़ों से बहते हुए व्यर्थ नालों में चला जाता था। इसको देखते हुए खेत में बड़ा तालाब बनवाया। इससे आसपास की जमीन के कुएं भी रिचार्ज हो रहे हैं। सिंचाई के लिए पानी भी पर्याप्त मिल रहा है। जिससे रबी और जायद की फसलों के लिए वरदान साबित हो रहा है।साथ ही कुओं का पीएच लेवल भी सुधर रहा है ।
दीपक नायक, किसान व सॉफ्टवेयर इंजीनियर बिराटिया कलां।


